शराबकांड के बाद बंडा की पुलिसिंग में सबसे बड़ा फेरबदल

शराबकांड के बाद बंडा की पुलिसिंग में सबसे बड़ा फेरबदल
थाना-चौकी के बड़े हिस्से का अमला बदला, रक्षित केंद्र से नई टीम उतारी, पहले थाना प्रभारी और एसडीओपी पर कार्रवाई, अब मैदानी पुलिसकर्मियों की बारी



सागर से न्यूज: 21 सितंबर, 2026 
सागर। बंडा के संदिग्ध जहरीली शराबकांड के बाद पुलिस महकमे में कार्रवाई का दायरा अब थाना और चौकी स्तर के मैदानी अमले तक पहुंच गया है। पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने 21 सितंबर को जारी आदेश में बंडा थाना और उससे जुड़ी चौकियों में पदस्थ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों का प्रशासनिक स्थानांतरण कर दिया। बंडा में लंबे समय से तैनात पुलिसकर्मियों को अलग-अलग स्थानों पर भेजा गया है, जबकि रक्षित केंद्र सागर से नए पुलिसकर्मियों को बंडा थाना और चौकियों में पदस्थ किया गया है। यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शराबकांड के बाद पहले थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी स्तर पर कार्रवाई हुई, फिर एसडीओपी स्तर पर बदलाव हुआ और अब थाना-चौकी के मैदानी अमले में व्यापक फेरबदल किया गया है। यानी घटना के बाद पुलिस महकमे में बदलाव की कार्रवाई एक-एक स्तर नीचे तक पहुंचती दिखाई दे रही है। हालांकि पुलिस अधीक्षक के मूल आदेश में “लाइन हाजिर” शब्द नहीं है। आदेश में साफ लिखा है कि संबंधित पुलिसकर्मियों को प्रशासनिक दृष्टिकोण से अस्थायी रूप से अग्रिम आदेश तक वर्तमान कार्यस्थल से नवीन कार्यस्थल पर कार्य हेतु आदेशित किया जाता है।  आदेश में बंडा थाना में पदस्थ आदिल खान, मुन्नालाल धुर्वे, प्रदीप सिंह राजपूत, जिनेन्द्र कुमार यादव, विमला यादव, देवी सिंह, गुलाब सिंह गौंड, भोलानाथ, राजमणी खटीक, रामनिवास, विक्रम सिंह, विनोद पटैल, शरद तिवारी सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को रक्षित केंद्र सागर भेजा गया है। इसके उलट रक्षित केंद्र से रामू प्रजापति, पूजा अहिरवार, दिनेश गौतम, नरेश कुमार जाटव, सुनील रोहित, बालकिशन सौर सहित कई पुलिसकर्मियों को बंडा थाना भेजा गया है। इसी तरह कई अन्य पुलिसकर्मियों की नई पदस्थापना रक्षित केंद्र से बंडा में की गई है।फेरबदल बंडा थाना तक सीमित नहीं है। गूगरा चौकी में भी नया अमला लगाया गया है। चौकी टड़ा केसली से राजेन्द्र पांडे को गूगरा चौकी प्रभारी बनाया गया है। रक्षित केंद्र से सोहित सिंह गौड और अमित कुमार पटेल को गूगरा चौकी भेजा गया है। बरा चौकी में भी रक्षित केंद्र से नए पुलिसकर्मियों की पदस्थापना की गई है। यानी पुलिस अधीक्षक के आदेश का असर बंडा थाना भवन से लेकर मैदानी चौकियों तक दिखाई देगा। पुराने अमले का बड़ा हिस्सा हटने और रक्षित केंद्र से नए कर्मचारियों के आने के बाद बंडा की पुलिसिंग टीम का स्वरूप बदल जाएगा।
अब सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े फेरबदल की जरूरत क्यों पड़ी? इसका जवाब शराबकांड के बाद हुई कार्रवाई की पूरी कड़ी में दिखाई देता है। संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों का मामला सामने आने के बाद बंडा थाना प्रभारी और गूगरा चौकी प्रभारी को निलंबित किया गया था। इसके बाद एसडीओपी स्तर पर भी कार्रवाई हुई। मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू हुई और जांच का दायरा बढ़ता गया।नजांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने कथित अवैध शराब नेटवर्क की कड़ियां बंडा से बाहर दूसरे शहरों और राज्यों तक पहुंचने का दावा किया। प्रकाशित पुलिस जांच रिपोर्टों में दिल्ली से लिक्विड आने, ग्वालियर में पैकेजिंग और सागर क्षेत्र में कथित सप्लाई की कड़ियों का उल्लेख किया गया है। इस मामले में बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां होने की जानकारी भी सामने आई। ऐसे में बंडा थाना और उससे जुड़ी चौकियों का मैदानी अमला बदलना घटना के बाद पुलिसिंग व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा सकता है। हालांकि पुलिस आदेश में यह नहीं कहा गया है कि स्थानांतरित किए गए सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ शराबकांड में कोई आरोप या लापरवाही साबित हुई है। इसलिए तबादले को व्यक्तिगत दोष का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। दूसरे आदेश में प्रशिक्षण पूरा कर चुके नए आरक्षकों की भी अलग-अलग थानों में पदस्थापना की गई है। इनमें सुरेश देवदा, मो. आसिफ खान, बहादुर डाबर, लवकुश राठौर, सोनू रजक, राजकुमारी प्रजापति और अर्चना अहिरवार को बंडा थाना भेजा गया है। इससे साफ है कि पुराने अमले के स्थानांतरण के साथ नई पुलिस टीम की आमद भी शुरू हो गई है। शराबकांड के बाद हुई कार्रवाई की टाइमलाइन देखें तो पहले जिम्मेदार पदों पर बदलाव हुआ, फिर आरोपियों की धरपकड़ और नेटवर्क की जांच आगे बढ़ी और अब मैदानी पुलिसिंग टीम को बदल दिया गया है। प्रशासनिक नजरिए से यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि बंडा क्षेत्र में अब नई टीम को कानून-व्यवस्था के साथ अवैध शराब पर निगरानी और मामले से जुड़े प्रकरणों की कार्रवाई भी संभालनी होगी। आदेश ने एक बात साफ कर दी है—बंडा में सिर्फ अधिकारी नहीं बदले, मैदानी पुलिसिंग का चेहरा भी बदल दिया गया है। अब इस बड़े फेरबदल की असली परीक्षा नई टीम की कार्रवाई और उसके परिणामों से होगी।

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