कलेक्टर न्यायालय का बड़ा एक्शन : अवैध निर्माण नहीं हटाया तो बुलडोजर चलेगा, एफआईआर भी होगी:

खेतों में कॉलोनी काटकर प्लॉट बेचने वालों की खैर नहीं, 15 दिन का अल्टीमेटम

कलेक्टर न्यायालय का बड़ा एक्शन : अवैध निर्माण नहीं हटाया तो बुलडोजर चलेगा, एफआईआर भी होगी: जमीन के खसरे में दर्ज होगा ‘अहस्तांतरणीय’



सागर से न्यूज: 4 सितंबर, 2026 (शुक्रवार)
सागर। शहर से लेकर कस्बों तक कृषि जमीन को टुकड़ों में बांटकर प्लॉट बेचने का खेल करने वालों के लिए अब खतरे की घंटी बज गई है। बिना डायवर्जन, बिना कॉलोनाइजर लाइसेंस और बिना जरूरी अनुमति के जमीन पर प्लॉटिंग कर कॉलोनी विकसित करने वालों पर कलेक्टर न्यायालय ने सख्ती शुरू कर दी है। बीना और रहली क्षेत्र के पांच मामलों में कार्रवाई करते हुए संबंधित लोगों को महज 15 दिन की मोहलत दी गई है। इस अवधि में अवैध निर्माण और चिन्हांकन नहीं हटाया तो प्रशासन खुद मौके पर पहुंचेगा, अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलेगा और संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल की इस कार्रवाई ने अवैध कॉलोनाइजेशन के कारोबार में लगे लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन ने इस बार कार्रवाई को सिर्फ नोटिस तक सीमित नहीं रखा है। संबंधित जमीनों की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए उनकी सूची उप-पंजीयक कार्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इतना ही नहीं, संबंधित खसरों के कॉलम नंबर 12 में ‘अहस्तांतरणीय’ दर्ज किया जाएगा। यानी जिस जमीन पर नियमों को दरकिनार कर प्लॉटिंग का खेल पकड़ा गया है, उसके आगे के लेन-देन पर भी प्रशासन की नजर रहेगी। जानकारी के अनुसार बीना के मौजा इटावा में तो कार्रवाई का मामला खासा गंभीर है। खसरा नंबर 514/2/1/1/1/1/1/1/1/1/1/1, रकबा 0.717 हेक्टेयर जमीन पर बिना व्यपवर्तन और बिना कॉलोनाइजर लाइसेंस के प्लॉटिंग किए जाने का मामला सामने आया है। कलेक्टर न्यायालय के आदेश के मुताबिक इस जमीन पर 28 भूखंड बेचे गए। इस मामले में आदित्य पिता देवेन्द्र सिंह ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अब उन्हें 15 दिन के भीतर अवैध निर्माण और चिन्हांकन हटाना होगा। समय सीमा खत्म होने के बाद कार्रवाई की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। रहली में भी एक के बाद एक चार मामलों में कार्रवाई ने अवैध प्लॉटिंग के मामले की गंभीरता उजागर की है। मौजा खमरिया की खसरा नंबर 221/1/1, रकबा 0.164 हेक्टेयर कृषि भूमि पर बिना डायवर्जन और स्वीकृति के कॉलोनी निर्माण के मामले में महेंद्र उर्फ मुन्ना पिता रामनाथ घोषी के खिलाफ आदेश जारी किया गया है। इसी मौजा में खसरा नंबर 537/2, रकबा 0.394 हेक्टेयर भूमि पर बिना अनुज्ञा एवं विकास कार्यों की स्वीकृति के प्लॉट बेचने के मामले में पुष्पा पति विनोद जैन के खिलाफ कार्रवाई की गई है।मौजा रहलीखास में खसरा नंबर 309/42/1/1/1, रकबा 0.2845 हेक्टेयर भूमि पर बिना अनुमति प्लॉटिंग करने के मामले में चंद्रभान पिता द्वारकाप्रसाद शर्मा के खिलाफ आदेश पारित किया गया है। वहीं मौजा बमूराजैसिंह में खसरा नंबर 10/6/1/1/1/1/1/1, रकबा 1.227 हेक्टेयर जमीन पर बिना सक्षम अनुज्ञा भूखंडों का विक्रय करने के मामले में संजना पति संतोष तिवारी के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। इन मामलों में अब केवल जमीन पर बनी संरचनाएं ही निशाने पर नहीं हैं, बल्कि जमीन की रजिस्ट्री भी रोकने की तैयारी है। कलेक्टर ने संबंधित एसडीओ को निर्देश दिए हैं कि कार्रवाई वाली जमीनों की सूची उप-पंजीयक कार्यालय भेजी जाए। इससे साफ है कि प्रशासन अवैध कॉलोनी के पूरे लेन-देन पर शिकंजा कसना चाहता है। बीना में 0.717 हेक्टेयर जमीन पर 28 प्लॉट की बिक्री का मामला कई सवाल भी खड़े करता है। कृषि भूमि को प्लॉटिंग के लिए किस स्तर पर तैयार किया गया, जमीन पर किस तरह चिन्हांकन किया गया और भूखंडों की बिक्री कैसे हुई—इन सवालों का जवाब प्रशासनिक कार्रवाई के आगे के चरण में महत्वपूर्ण होगा। यही वजह है कि अब निगाह इस बात पर भी है कि क्या जिले में ऐसी अन्य जमीनों की जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा। अवैध कॉलोनियों का खेल सिर्फ जमीन काटकर बेचने तक सीमित नहीं रहता। प्लॉट खरीदने वाले लोगों को बाद में सड़क, नाली, बिजली, जल निकासी, निर्माण अनुमति और अन्य सुविधाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन की कार्रवाई ने उन लोगों को भी चेतावनी दी है जो कम कीमत के लालच में बिना दस्तावेज और स्वीकृति जांचे प्लॉट खरीद लेते हैं। 
मध्यप्रदेश नगर पालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 के तहत की जा रही कार्रवाई में अब गेंद संबंधित लोगों के पाले में है। 15 दिन में अवैध निर्माण और चिन्हांकन हटाया तो ठीक, नहीं तो प्रशासन कार्रवाई करेगा। बुलडोजर चलेगा, एफआईआर होगी और जमीन के रिकॉर्ड में उसे ‘अहस्तांतरणीय’ दर्ज किया जाएगा।कलेक्टर न्यायालय के इन आदेशों ने फिलहाल बीना और रहली के पांच मामलों में कार्रवाई का रास्ता साफ किया है, लेकिन इसका संदेश पूरे जिले के लिए साफ है कृषि जमीन पर बिना अनुमति प्लॉटिंग कर कॉलोनी काटना और भूखंड बेचना अब प्रशासन की नजर से बचना आसान नहीं होगा।

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