रिटायर्ड रेलकर्मी से 3.61 लाख की धोखाधड़ी, 90 से ज्यादा लोगों के फंसने का आरोप
हज के सपनों पर ठगी का ग्रहण: रिटायर्ड रेलकर्मी से 3.61 लाख की धोखाधड़ी, 90 से ज्यादा लोगों के फंसने का आरोप
2019 में हज यात्रा के लिए जमा कराए 4.40 लाख रुपए, न यात्रा कराई, न पूरी रकम लौटाई, पुलिस ने एजेंट और सहयोगी पर दर्ज किया मामला
सागर से न्यूज: 13 जुलाई,2026
सागर। जिंदगीभर नौकरी करने के बाद रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी मोहम्मद सलीम खान ने अपनी पत्नी के साथ हज पर जाने का सपना देखा था। इसके लिए उन्होंने वर्षों की बचत एक निजी ट्रेवल एजेंट के भरोसे सौंप दी। उम्मीद थी कि कुछ ही महीनों में मक्का-मदीना की पवित्र यात्रा पूरी होगी, लेकिन सपना धीरे-धीरे ठगी की कहानी में बदल गया। पहले कोरोना महामारी का हवाला मिला, फिर सीटें भर जाने की बात कहकर उन्हें टाल दिया गया। आखिरकार जब सरकारी कोटे से हज यात्रा पूरी कर वे लौटे और अपनी जमा राशि वापस मांगी तो आरोप है कि उन्हें पैसे लौटाने के बजाय धमकियां मिलने लगीं। करीब छह साल पुराने इस मामले में अब मोतीनगर थाना पुलिस ने ट्रेवल एजेंट और उसके सहयोगी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित का आरोप है कि सिर्फ उनके साथ ही नहीं, बल्कि इसी तरह करीब 90 अन्य लोगों से भी हज यात्रा कराने के नाम पर लाखों रुपए लेकर उन्हें न यात्रा कराई गई और न ही पूरी रकम लौटाई गई। हालांकि इस दावे की पुष्टि फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। मिली जानकारी के अनुसार बम्होरी रेगुवां निवासी रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी मोहम्मद सलीम खान ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पत्नी के साथ हज यात्रा पर जाने का निर्णय लिया था। इसी दौरान उनके रिश्तेदार मोहम्मद इकबाल ने उनकी मुलाकात शुक्रवारी वार्ड निवासी निजाम अंसारी से कराई। निजाम ने खुद को इंदौर स्थित अल मलिक हज उमराह जियारत संस्था का अधिकृत एजेंट बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह दोनों की हज यात्रा की पूरी व्यवस्था करेगा। उसने प्रति व्यक्ति 2.20 लाख रुपए का खर्च बताया। शिकायत के अनुसार एजेंट की बातों पर भरोसा करते हुए 15 जून 2019 को उसके बताए बैंक खाते में 3.40 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। इसके बाद 17 जनवरी 2020 को एसबीआई के चेक के माध्यम से एक लाख रुपए और जमा करा दिए। इस तरह दंपती ने हज यात्रा के लिए कुल 4 लाख 40 हजार रुपए एजेंट को सौंप दिए। वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना महामारी के कारण हज यात्राएं प्रभावित रहीं, इसलिए दंपती यात्रा पर नहीं जा सके। लेकिन जब हालात सामान्य हुए और वर्ष 2022 में उन्होंने एजेंट से यात्रा कराने की बात कही तो हर बार उन्हें सीटें भर जाने और अगली सूची में नाम शामिल कराने का आश्वासन देकर टाल दिया गया। लगातार इंतजार और निराशा के बाद मोहम्मद सलीम खान ने वर्ष 2023 में सरकारी हज कोटे के माध्यम से आवेदन किया। चयन होने पर उन्होंने अपनी पत्नी के साथ सरकारी व्यवस्था के जरिए हज यात्रा पूरी की। यात्रा से लौटने के बाद उन्होंने निजी एजेंट से अपनी जमा राशि वापस मांगी।
पीड़ित का कहना है कि लगातार दबाव बनाने के बाद एजेंट ने अलग-अलग किश्तों में केवल 79 हजार रुपए ही लौटाए। इसके बाद उसने शेष 3 लाख 61 हजार रुपए वापस नहीं किए। कई बार संपर्क करने के बावजूद रकम लौटाने के बजाय लगातार टालमटोल की जाती रही।।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जब बकाया राशि वापस मांगी गई तो एजेंट ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और झूठे मामले में फंसाकर जेल भिजवाने तक की धमकी दी। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस की शरण ली और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इसी एजेंट और उसके सहयोगियों ने हज यात्रा कराने के नाम पर करीब 90 अन्य लोगों से भी लाखों रुपए लिए हैं। कई लोगों को वर्षों तक यात्रा नहीं कराई गई और न ही उनकी पूरी रकम लौटाई गई। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में जांच जारी है और अन्य शिकायतें मिलने पर उन्हें भी विवेचना में शामिल किया जाएगा। मोतीनगर थाना पुलिस ने मोहम्मद सलीम खान की शिकायत के आधार पर स्थानीय एजेंट निजाम अंसारी और उसके सहयोगी मोहम्मद इकबाल के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस बैंक ट्रांजेक्शन, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। यदि जांच में अन्य पीड़ितों के आरोप भी सही पाए जाते हैं तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है।


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