पेरिनेटल चिकनपॉक्स जैसी दुर्लभ और जानलेवा बीमारी से जूझ रहे बच्चे को मौत के मुँह से खींच लाए बीएमसी के डॉक्टर
पेरिनेटल चिकनपॉक्स जैसी दुर्लभ और जानलेवा बीमारी से जूझ रहे बच्चे को मौत के मुँह से खींच लाए बीएमसी के डॉक्टर
|सागर से न्यूज: 10 फरवरी,2026|
सागर: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) सागर ने जन्म के तुरंत बाद पेरिनेटल चिकनपॉक्स जैसी अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा बीमारी से पीड़ित एक नवजात शिशु को बीएमसी के शिशु रोग विशेषज्ञों की टीम ने सफल इलाज देकर नया जीवन प्रदान किया। वह नवजात, जिसे निजी अस्पतालों और विशेषज्ञों ने गंभीर हालत के चलते इलाज से मना कर दिया था, आज पूरी तरह स्वस्थ है। परिजनों के अनुसार, जन्म के कुछ ही समय बाद नवजात को सांस लेने में अत्यधिक परेशानी होने लगी। हालत लगातार बिगड़ती चली गई। घबराए परिजन बच्चे को 2 से 3 निजी अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास लेकर गए, लेकिन सभी ने स्थिति को अत्यंत जटिल बताते हुए हाथ खड़े कर दिए। अंततः आखिरी उम्मीद के रूप में बच्चे को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर लाया गया। बीएमसी पहुँचने पर नवजात की हालत बेहद नाजुक थी। वह स्वयं सांस लेने में असमर्थ था। शिशु रोग विभाग की टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिना समय गंवाए बच्चे को तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा और आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया। विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के समय चिकनपॉक्स का संक्रमण (Perinatal Chickenpox) एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी है, जो लगभग एक लाख नवजातों में से किसी एक को होती है। यह बीमारी इतनी घातक होती है कि इसमें मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक बताई जाती है। यानी संक्रमित होने वाले आधे नवजातों की जान नहीं बच पाती। इस संक्रमण के साथ कई गंभीर जटिलताओं का भी खतरा रहता है, जिनमें मस्तिष्क के विकास का रुक जाना, लिवर फेलियर, रक्त का थक्का जमने की समस्या, आंखों की रोशनी और सुनने की क्षमता पर स्थायी असर होता है। यह बीमारी अत्यंत संक्रामक होती है, जिससे इलाज में लगे डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को भी संक्रमण का गंभीर खतरा बना हुआ था। इसके बावजूद, शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष जैन के मार्गदर्शन में तथा डॉ. अजीत असाटी और डॉ. महेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में पूरी टीम ने चुनौती को स्वीकार किया और सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए बच्चे का इलाज शुरू किया नवजात को पूरी तरह आइसोलेशन में रखा गया और चौबीसों घंटे विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार जारी रखा गया। इस जटिल इलाज में डॉ. रूपा अग्रवाल, डॉ. अंकित जैन, डॉ. अंकित जैन (सीनियर), डॉ. हर्ष पाटीदार, डॉ. पीयूष गुप्ता, डॉ. दिव्याश्री बघेल, डॉ. यश सोनी और डॉ. एस.के. पांडे सहित नर्सिंग स्टाफ का विशेष और सराहनीय योगदान रहा।
⏩बीएमसी के मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि डॉक्टरों की सतत निगरानी, समर्पण और टीमवर्क का ही परिणाम है कि नवजात की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। बच्चा अब बिना वेंटिलेटर के स्वयं सांस ले रहा है और सामान्य रूप से दूध भी पी रहा है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर और अधीक्षक डॉ. राजेश जैन ने इस सफल उपचार के लिए पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है।

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