सेंट पॉल ईएल चर्च में गुड फ्राइडे पर प्रभु यीशु की सात अंतिम वाणियों पर हुआ मनन

सेंट पॉल ईएल चर्च में गुड फ्राइडे पर प्रभु यीशु की सात अंतिम वाणियों पर हुआ मनन



सागर से न्यूज: 4 अप्रैल,2026 (शनिवार)

सागर। सेंट पॉल ईएल चर्च में गुड फ्राइडे के अवसर पर विशेष आराधना एवं मनन सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक प्रभु यीशु मसीह द्वारा क्रूस पर से कही गई अंतिम सात वाणियों पर विस्तारपूर्वक चिंतन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और प्रभु के बलिदान को स्मरण करते हुए प्रार्थना की। 

सभा की शुरुआत पहली वाणी – “हे पिता, इन्हें क्षमा कर क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं” – के संदेश के साथ हुई, जिस पर पास्टर राहुल यादव ने मनन प्रस्तुत किया। उन्होंने क्षमा, करुणा और प्रेम के महत्व पर प्रकाश डाला।

दूसरी वाणी – “मैं तुझे सच कहता हूं कि तू आज ही मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा” – के माध्यम से प्रभु के दया और उद्धार के संदेश को साझा किया गया।

 तीसरी वाणी – “हे नारी, देख यह तेरा पुत्र है” – पर शीला दास ने विचार व्यक्त करते हुए मानवीय संबंधों और जिम्मेदारियों की व्याख्या की।

चौथी वाणी – “हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तूने क्यों मुझे छोड़ दिया” – पर गहन आध्यात्मिक चिंतन प्रस्तुत किया गया, जिसमें मानव पीड़ा और विश्वास के संघर्ष को समझाया गया।

पांचवीं वाणी – “मैं प्यासा हूं” – पर विनी वाल्टर ने प्रभु की मानवीय पीड़ा और बलिदान को रेखांकित किया। छठवीं वाणी – “पूरा हुआ” – पर रेव्हरेंड जयंत सिंह मैथ्यूज ने बताया कि यह वाणी प्रभु के उद्धार कार्य की पूर्णता का प्रतीक है। अंत में सातवीं वाणी – “हे मेरे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं” – पर बिशप हैरिस वॉल्टर ने संदेश देते हुए पूर्ण समर्पण और विश्वास की भावना को समझाया।

चर्च सचिव ई. वाय. कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि गुड फ्राइडे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर चढ़ने और उनके बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिन मानवता के पापों के प्रायश्चित के लिए दिए गए उनके अंतिम स्वैच्छिक बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व ईश्वर के असीम प्रेम, भविष्यवाणियों की पूर्ति, पाप पर विजय, तथा मुक्ति और शाश्वत जीवन के मार्ग को दर्शाता है। प्रभु यीशु, जिन्हें ईश्वर का निष्पाप पुत्र माना जाता है, ने मानवता के पापों को अपने ऊपर लेकर अपने प्राणों का बलिदान दिया और इस प्रकार मृत्यु तथा पाप के बंधनों को तोड़ दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने मौन प्रार्थना कर प्रभु यीशु के बलिदान को स्मरण किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।





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