बीएमसी में नवजात की मौत से मचा हड़कंप
बीएमसी में नवजात की मौत से मचा हड़कंप
प्रसव के दौरान लापरवाही का आरोप: “समय पर इलाज मिलता तो बच जाती जान”, कलेक्टर ने बैठाई जांच
सागर से न्यूज: 26 अप्रैल 2026 ( रविवार)
सागर| बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में प्रसव के दौरान एक नवजात की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। दैनिक भास्कर को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर द्वारा समय पर उचित इलाज नहीं दिए जाने के आरोप लगे हैं। घटना के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया और परिजनों के आक्रोश के बीच प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। सागर जिले के जौरा नरयावली गांव की रहने वाली रीना राजपूत को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन बीएमसी लेकर पहुंचे थे। परिवार को उम्मीद थी कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में सुरक्षित डिलीवरी होगी, लेकिन हालात अचानक बिगड़ गए। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी डॉक्टर ने समय पर इलाज नहीं दिया, जिससे नवजात की मौत हो गई। परिवार के सदस्यों ने बताया कि प्रसव के दौरान स्थिति गंभीर होने के बावजूद डॉक्टरों ने समय पर ध्यान नहीं दिया। उनका कहना है कि यदि तत्काल इलाज मिलता, तो नवजात की जान बच सकती थी। घटना के बाद अस्पताल परिसर में रोते-बिलखते परिजनों का दर्द साफ नजर आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती प्रतिभा पाल ने तत्काल तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति में डॉ. सचिन मलैया (क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं), डॉ. ब्रजेश यादव (जिला चिकित्सालय सागर) और प्रवीण दुबे (नायब तहसीलदार, सागर ग्रामीण) शामिल हैं। जांच दल को निर्देश दिए गए हैं कि वह मौके पर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच करे। इलाज में हुई कथित देरी, ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ की भूमिका और अस्पताल की व्यवस्थाओं की विस्तृत पड़ताल की जाएगी। टीम आवश्यक दस्तावेजों के साथ तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपेगी।प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच में लापरवाही साबित होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस मामले का सच सामने लाएगी।

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