15 साल बाद चढ़ा पुलिस के हत्थे पैरोल जंपर

15 साल बाद चढ़ा पुलिस के हत्थे पैरोल जंपर, सगे भाई को पहले जयपुर से दबोचा

ईद से पहले घर लौटने की फिराक में था आरोपी



सागर से न्यूज: 20 मार्च, 2026 शुक्रवार

सागर। गोपालगंज थाना पुलिस ने 15 साल पुराने मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए पैरोल जंप कर फरार चल रहे 30 हजार के इनामी आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। खास बात यह है कि इसी प्रकरण में उसके सगे भाई को कुछ दिन पहले ही जयपुर (राजस्थान) से पकड़ा जा चुका है। इस तरह एक ही केस में फरार दोनों भाइयों की गिरफ्तारी के साथ पुलिस ने लंबित प्रकरण का लगभग पटाक्षेप कर दिया है।पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक विकाश कुमार शाहवाल के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन और नगर पुलिस अधीक्षक ललित कश्यप के पर्यवेक्षण में की गई। थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा के नेतृत्व में टीम लगातार फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी।पुलिस के अनुसार, आरोपी अब्दुल जाहिद वर्ष 2011 में सेंट्रल जेल सागर से पैरोल पर बाहर आया था, लेकिन तय समय खत्म होने के बाद वापस नहीं लौटा। तभी से वह फरार चल रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। लंबे समय तक पुलिस को चकमा देने के कारण उस पर 30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। इसी बीच इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब उसके सगे भाई अब्दुल राशिद, जो समान रूप से इनामी था, को हाल ही में गोपालगंज पुलिस ने जयपुर से एक सुनियोजित कार्रवाई में गिरफ्तार किया। इसके बाद पुलिस ने दूसरे आरोपी की तलाश और तेज कर दी। जांच के दौरान उपनिरीक्षक नीरज जैन को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी ईद से पहले अपने पुराने इलाके शनिचरी में आने की कोशिश कर सकता है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने इलाके में गुप्त निगरानी शुरू कर दी। हनुमान अखाड़ा क्षेत्र में निगरानी के दौरान खिन्नी के पेड़ के पास एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया, जो नीले रंग की शर्ट पहने और लाठी के सहारे चल रहा था। मुखबिर द्वारा बताए गए हुलिये से मिलान होने पर पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। शुरुआत में उसने अपनी पहचान छुपाने की कोशिश की, लेकिन सख्त पूछताछ में उसने अपना नाम अब्दुल जाहिद होना स्वीकार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को 20 मार्च 2026 को दोपहर 12:25 बजे विधिवत गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे थाने लाकर हवालात में रखा गया है। आरोपी के फिंगरप्रिंट, फोटो सहित अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं और मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है। परिजनों को भी सूचना दे दी गई है। इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक आरकेएस चौहान (कंट्रोल रूम) सहित प्रधान आरक्षक दीपक व्यास, अनिल प्रभाकर, गौतम, यशवंत यादव, कैलाश सेन, अशोक, मोहन सिंह राजपूत, हरिओम, जय सिंह, राधेश्याम तथा आरक्षक आशीष, मनीष, हीरेंद्र, आनंद, अंकित तिवारी, भरत अहिरवार और देवेंद्र पांडे की अहम भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एक ही प्रकरण में फरार दोनों सगे भाइयों की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि लगातार निगरानी, सटीक रणनीति और मजबूत टीमवर्क के चलते अपराधियों के लिए बच पाना मुश्किल है। इस कार्रवाई से आमजन में कानून के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।

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