15 वर्षों से फरार इनामी स्थाई वारंटी गिरफ्तार
15 वर्षों से फरार इनामी स्थाई वारंटी गिरफ्तार, जयपुर में भेष बदलकर छिपा था आरोपी
सागर से न्यूज: 17 मार्च,2026
सागर। जिले में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और लंबे समय से फरार गंभीर अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना गोपालगंज पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने 15 वर्षों से फरार चल रहे ₹30,000 के इनामी स्थाई वारंटी आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अब्दुल राशिद पिता अब्दुल वाहिद, निवासी शनिचरी चौगना, थाना गोपालगंज के रूप में हुई है। वह वर्ष 2011 से फरार था और पुलिस महानिरीक्षक सागर द्वारा उस पर ₹30,000 का इनाम घोषित किया गया था। बताया गया है कि आरोपी हत्या के एक गंभीर प्रकरण में जेल में बंद था, जहां उपचार के दौरान वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। फरारी के बाद वह लगातार अपनी पहचान छुपाता रहा और अलग-अलग स्थानों पर ठिकाना बदलकर करीब 15 वर्षों तक गिरफ्तारी से बचता रहा। पुलिस अधीक्षक सागर विकाश कुमार शाहवाल के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन तथा नगर पुलिस अधीक्षक ललित कश्यप एवं थाना प्रभारी गोपालगंज घनश्याम शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, तकनीकी विश्लेषण और मजबूत सूचना तंत्र के आधार पर आरोपी के संभावित ठिकानों का पता लगाया। जांच के दौरान आरोपी के जयपुर (राजस्थान) में होने की सूचना मिली, जिसके बाद उप निरीक्षक नीरज जैन के नेतृत्व में टीम को वहां भेजा गया। पुलिस टीम ने सिविल ड्रेस में जयपुर में 4-5 दिनों तक डेरा डालकर लगातार निगरानी की और स्थानीय स्तर पर जानकारी एकत्रित की। इस दौरान तकनीकी सहयोग में प्रधान आरक्षक सौरभ, आरक्षक कुलदीप और हेमेंद्र की भूमिका रही, वहीं थाना स्तर पर आरक्षक हीरेन्द्र और थिरबम द्वारा इंटेलिजेंस का विश्लेषण किया गया। रिकॉर्ड संधारण और दस्तावेजों की जांच में प्रधान आरक्षक अनिल प्रभाकर तथा उनके सहयोगी भरत और महेंद्र ने कार्य किया। आरक्षक दशरथ ने जेल एवं अन्य अभिलेखों का सूक्ष्म अध्ययन कर आरोपी की प्रवृत्ति और छिपने के तरीकों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई। वहीं मूल निवास क्षेत्र से संबंधित सूचनाएं एकत्र करने में आरक्षक आनंद सिंधु की भूमिका रही। प्रदेश के बाहर गई टीम और अन्य टीमों के बीच समन्वय स्थापित करने में उप निरीक्षक आरकेएस चौहान ने अहम योगदान दिया। लगातार निगरानी के दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को चिन्हित किया, जिसकी गतिविधियां और हुलिया आरोपी से मेल खाते थे। इसके बाद टीम ने सटीक रणनीति के तहत घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पकड़े जाने के बाद आरोपी ने स्वयं को “मदन” बताकर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन फिजिकल वेरिफिकेशन और गहन पूछताछ में उसकी असली पहचान अब्दुल राशिद के रूप में सामने आई, जिसे उसने स्वीकार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को सुरक्षित अभिरक्षा में लेकर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई पूरी की गई और उसे न्यायालय में प्रस्तुत कर जेल भेज दिया गया। 15 वर्षों से फरार इनामी आरोपी की गिरफ्तारी को सागर पुलिस की रणनीति, धैर्य, तकनीकी दक्षता और जमीनी इंटेलिजेंस का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, पुलिस की पैनी नजर और मजबूत रणनीति से बच नहीं सकता। सागर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फरार अपराधियों के खिलाफ इसी प्रकार की सख्त और प्रभावी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी तथा आमजन की सुरक्षा के लिए पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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