शब-ए-बरात
आज शब-ए-बरात: कब्रिस्तानों में फातेहा, मस्जिदों में रातभर इबादत, कब्रिस्तान में तैयारियां पूरी
सागर से न्यूज: 2 फरवरी,2026
सागर: रहमतों और मगफिरत की मुकद्दस रात शब-ए-बरात मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को अकीदत और एहतराम के साथ मनाई जा रही है। इस मौके पर मुस्लिम समाज के लोग अपने गुनाहों की माफी और अल्लाह की रजा हासिल करने के लिए रातभर इबादत में मशगूल रहेंगे। शहर की मस्जिदों, ईदगाहों और कब्रिस्तानों में इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शब-ए-बरात की रात अकीदतमंद अपने बुजुर्गों और परिजनों की कब्रों पर जाकर फातेहा पढ़ेंगे और उनके लिए दुआएं करेंगे। कब्रों पर फूल और इत्र चढ़ाने के साथ अगरबत्ती व मोमबत्तियां भी जलाई जाएंगी। इसके बाद लोग नगर की विभिन्न मस्जिदों में पहुंचकर कुरान पाक की तिलावत, नफ्ल नमाज और विशेष दुआओं में शामिल होंगे। शब-ए-बरात को लेकर मोतीनगर कब्रिस्तान में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मोतीनगर कब्रिस्तान तंजीम कमेटी के अध्यक्ष इरशाद खान ‘पप्पू पहलवान’ ने बताया कि जायरीन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कब्रिस्तान में व्यापक स्तर पर साफ-सफाई कराई गई है। उन्होंने कहा कि “कब्रों के आसपास की झाड़ियां हटाई गई हैं और पूरे परिसर में लाइटिंग की गई है, ताकि रात के समय आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। साथ ही व्यवस्था बनाए रखने के लिए कमेटी के स्वयंसेवकों की तैनाती भी की गई है।
⏩मुस्लिम धर्मगुरुओं के अनुसार शब-ए-बरात को त्योहार नहीं बल्कि इबादत, तौबा और आत्ममंथन की रात के रूप में देखा जाता है। इस रात अल्लाह की बारगाह में गुनाहों से तौबा कर दुआ करने की विशेष अहमियत बताई गई है।
⏩मुस्लिम धर्मगुरुओं के अनुसार शब-ए-बरात के बाद आने वाले दिन शाबान माह का रोजा नफ्ल इबादत के रूप में रखा जाता है। धर्मगुरुओं का कहना है कि यह रोजा फर्ज नहीं है, लेकिन जो लोग अपनी श्रद्धा और अल्लाह की रजा के लिए इसे रखते हैं, उन्हें इसका सवाब मिलता है। यह रोजा इंसान को सब्र, परहेजगारी और आत्मसंयम की सीख देता है। रोजा रखने वाले लोग सहरी करते हैं और मगरिब की नमाज के बाद इफ्तार करते हैं।


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