ओवरलोड डंपरों से उड़ती फ्लाईएश बना रही ग्रामीणों की जिंदगी दूभर
ओवरलोड डंपरों से उड़ती फ्लाईएश बना रही ग्रामीणों की जिंदगी दूभर
सीपीसीबी गाइडलाइन के विपरीत नेट से ढंककर हो रहा परिवहन, रोज 200 से अधिक डंपर सड़कों पर गिरा रहे राख; कार्रवाई नहीं होने से बढ़ी नाराजगी
सागर से न्यूज: 11 फरवरी,2026
सागर| बीना स्थित जेपी थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाईएश के परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि प्लांट से बाहर ले जाई जा रही फ्लाईएश का परिवहन निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों के विपरीत किया जा रहा है, जिससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों ने इसे स्वास्थ्य के लिए खतरा बताते हुए प्रशासनिक उदासीनता पर नाराजगी जताई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार ऐश पाउंड से प्रतिदिन 200 से अधिक डंपरों के माध्यम से फ्लाईएश का परिवहन किया जा रहा है। आरोप है कि अधिकांश वाहन क्षमता से अधिक फ्लाईएश लोड कर रहे हैं और तिरपाल से पूर्ण रूप से ढंकने के बजाय केवल जालीदार नेट का उपयोग किया जा रहा है। इससे परिवहन के दौरान राख उड़कर सड़कों पर गिरती है और हवा में फैलती है। ग्रामीणों का कहना है कि डंपर गांवों से होकर गुजरते हैं, जिससे सड़क किनारे स्थित घरों, खेतों और दुकानों पर राख की परत जम जाती है। राहगीरों को धूल और राख के गुबार के बीच से निकलना पड़ता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा फ्लाईएश के सुरक्षित परिवहन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार फ्लाईएश का परिवहन बंद कंटेनर या ट्रकों में पूर्ण रूप से तिरपाल से ढंककर किया जाना अनिवार्य है, ताकि उड़नशील राख वातावरण में न फैले।
ग्रामीणों का आरोप है कि इन नियमों की अनदेखी कर खुले अथवा आंशिक रूप से ढंके वाहनों से परिवहन किया जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के प्रावधानों की भावना के विपरीत है।
स्वास्थ्य पर असर, सांस और आंखों की शिकायतें
गांववासियों ने बताया कि उड़ती फ्लाईएश के कारण घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है। भोजन और पेयजल तक राख से प्रभावित हो रहे हैं। कई लोगों ने सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी समस्याओं की शिकायत की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थिति पर शीघ्र नियंत्रण नहीं किया गया तो स्वास्थ्य संकट गहरा सकता है।
मामले में स्थानीय पुलिस, परिवहन विभाग (आरटीओ) और प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मौखिक एवं लिखित शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रभावी निरीक्षण या दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई। ओवरलोडिंग और मानक विरुद्ध परिवहन पर नियामक एजेंसियों की कथित शिथिलता के कारण संबंधित कंपनियां मनमानी कर रही हैं। हालांकि इस संबंध में जब संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने मीडिया से औपचारिक रूप से कुछ भी कहने से इनकार किया।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि फ्लाईएश परिवहन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ओवरलोडिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित करने और नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए नियमों के पालन और ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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